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अध्याय 2 — सांख्य योग

श्लोक 4
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ अर्जुन उवाच ॥

कथं भीष्ममहं सङ्ख्ये द्रोणं च मधुसूदन ।

इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन ॥4॥

🕉 हिन्दी अनुवाद

📜 अनुवाद हिन्दी

💬 व्याख्या हिन्दी

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