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अध्याय 4 — ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 5
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ श्री भगवानुवाच ॥


बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन।

तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परंतप ॥ 5 ॥


🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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