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अध्याय 4 — ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 22
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

यदृच्छालाभसन्तुष्टो द्वन्द्वातीतो विमत्सरः ।

समः सिद्धावसिद्धौ च कृत्वापि न निबध्यते ॥22॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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