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अध्याय 4 — ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 21
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

निराशीर्यतचित्तात्मा त्यक्तसर्वपरिग्रहः ।

शारीरं केवलं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम् ॥21॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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