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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 56
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः।

मत्प्रसादाद्वाप्नोति शाश्वतं पदमव्ययम्।।56।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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