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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 64
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

सर्वगुह्यतमं भूयः शृणु मे परमं वचः।

इष्टोऽसि मे दृढमिति ततो वक्ष्यामि ते हितम्।।64।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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