भाषा चुनें:

अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 19
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

ज्ञानं कर्म च कर्ता च त्रिधैव गुणभेदतः ।

प्रोच्यते गुणसंख्याने यथावच्छृणु तान्यपि ॥19॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


Gita Prerna Logo
Go Back Top