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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 48
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत्।

सर्वारम्भा हि दोषेण धूमेनाग्निरिवावृताः।।48।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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