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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 44
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

कृषिगौरक्ष्य वाणिज्यं वैश्यकर्म स्वभावजम्।

परिचर्यात्मकं कर्म शूद्रस्यापि स्वभावजम्।।44।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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