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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 63
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया।

विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु।।63।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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