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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 10
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

न द्वेष्ट्यकुशलं कर्म कुशले नानुषज्जते ।

त्यागी सत्त्वसमाविष्टो मेधावी छिन्नसंशयः ॥10॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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