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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 35
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

यया स्वप्नं भयं शोकं विषादं मदमेव च ।

न विमुंचति दुर्मेधा धृतिः सा पार्थ तामसी ॥35॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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