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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 29
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

बुद्धेर्भेदं धृतेश्चैव गुणतस्त्रिविधं शृणु ।

प्रोच्यमानमशेषेण पृथक्त्वेन धनंजय ॥29॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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