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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 67
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

इदं ते नातपस्काय नाभक्ताय कदाचन।

न चाशुश्रूषवे वाच्यं न च मां योऽभ्यसूयति।।67।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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