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अध्याय 18 — मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 74
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ संजय उवाच ॥

इत्यहं वासुदेवस्य पार्थस्य च महात्मनः।

संवादिममश्रौषमद्भुतं रोमहर्षणम्।।74।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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