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अध्याय 5 — कर्म संन्यास योग

श्लोक 11
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

कायेन मनसा बुद्ध्या केवलैरिन्द्रियैरपि।

योगिनः कर्म कुर्वन्ति संगं त्यक्त्वात्मशुद्धये ॥ 11 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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