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अध्याय 3 — कर्म योग

श्लोक 27
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

प्रकृते: क्रियमाणानि गुणै: कर्माणि सर्वश: ।
अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते॥27॥

🕉 हिन्दी अनुवाद

📜 अनुवाद हिन्दी

💬 व्याख्या हिन्दी

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