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अध्याय 3 — कर्म योग

श्लोक 9
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः ।

तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसंगः समाचर ॥9॥

🕉 हिन्दी अनुवाद

📜 अनुवाद हिन्दी

💬 व्याख्या हिन्दी

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