भाषा चुनें:

अध्याय 3 — कर्म योग

श्लोक 14
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसम्भवः ।

यज्ञाद्भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्मसमुद्भवः ॥14॥

🕉 हिन्दी अनुवाद

📜 अनुवाद हिन्दी

💬 व्याख्या हिन्दी

Gita Prerna Logo
Go Back Top