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अध्याय 3 — कर्म योग

श्लोक 36
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

|| अर्जुन उवाच ||अथ केन प्रयुक्तोऽयं पापं चरति पूरुष: ।

अनिच्छन्नपि वाष्र्णेय बलादिव नियोजित: ॥36॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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