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अध्याय 3 — कर्म योग

श्लोक 23
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रित: ।

मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्या: पार्थं सर्वश: ॥23॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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