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अध्याय 3 — कर्म योग

श्लोक 29
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

प्रकृतेर्गुणसम्मूढा: सज्जन्ते गुणकर्मसु।

तानकृत्स्नविदो मन्दान्कृत्स्नविन्न विचालयेत्॥29॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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