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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 7
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम्।

मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद् द्रष्टमिच्छसि ॥ 7 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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