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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 19
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अनादिमध्यान्तमनन्तवीर्य अनन्तबाहुं शशिसूर्यनेत्रम् ।

पश्यामि त्वां दीप्तहुताशवक्त्रं स्वतेजसा विश्वमिदं तपन्तम् ।। 19 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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