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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 16
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अनेकबाहूदर वक्त्रनेत्रं पश्यामि त्वां सर्वतोऽनन्तरूपम् ।

नान्तं न मध्यं न पुनस्तवादिं पश्यामि विश्वेश्वर विश्वरूप ॥ 16 ।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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