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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 50
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ संजय उवाच ॥

इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः ।

आश्वासयामास च भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा ।। 50 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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