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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 12
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

दिवि सूर्यसहस्त्रस्य भवेद्युगपदुत्थित

 यदि भाः सदृशी सा स्याद्भासस्तस्य महात्मनः ।। 12 ।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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