भाषा चुनें:

अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 4
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो।

योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम् ॥ 4 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


Gita Prerna Logo
Go Back Top