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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 5-6
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ श्री भगवानुवाच ॥

पश्य मे पार्थ रूपाणि शतशोऽथ सहस्त्रशः ।

नानाविधानि दिव्यानि नानावर्णाकृतीनि च ॥5॥


पश्यादित्यान्वसून् रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा।

बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ॥७ ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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