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अध्याय 11 — विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक 52
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

॥ श्री भगवानुवाच ॥

सुदुर्दर्शमिदं रूपं दृष्टवानसि यन्मम ।

देवा अप्यस्य रूपस्य नित्यं दर्शनकांक्षिणः ॥52 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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