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अध्याय 13 — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 8
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

इन्द्रियार्थेषु वैराग्यमनहंकार एव च।

जन्ममृत्यु जराव्याधि दुःखदोषानुदर्शनम् ॥৪॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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