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अध्याय 13 — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 33
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः ।

क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत ॥33॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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