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अध्याय 13 — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 19-20
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

प्रकृतिं पुरुषं चैव विद्धयनादी उभावपि ।

विकारांश्च गुणांश्चैव विद्धि प्रकृति सम्भवान् ।। 19 ।।


कार्यकरण कर्तृत्वे हेतुः प्रकृतिरुच्यते ।

पुरुषः सुखदुःखानां भोक्तृत्वे हेतुरुच्यते ।। 20 ।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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