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अध्याय 13 — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 15
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

बहिरन्तश्च भूतानामचरं चरमेव च।

सूक्ष्मत्वात्तदविज्ञेयं दूरस्थं चान्तिके च तत् ॥15॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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