भाषा चुनें:

अध्याय 13 — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 32
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

यथा सर्वगतं सौक्ष्म्यादाकाशं नोपलिप्यते ।

सर्वत्रावस्थितो देहे तथात्मा नोपलिप्यते ॥32 ।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


Gita Prerna Logo
Go Back Top