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अध्याय 13 — क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक 12
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

ज्ञेयं यत्तत्प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वामृतमश्नुते ।

अनादिमत्परं ब्रह्म न सत्तन्नासदुच्यते ।॥ 12 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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