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अध्याय 8 — अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक 14
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अनन्यचेताः सततं यो मां स्मरति नित्यशः ।

तस्याहं सुलभः पार्थ नित्ययुक्तस्य योगिनः ॥14॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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