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अध्याय 6 — आत्म संयम योग

श्लोक 2
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

यं संन्यासमिति प्राहुर्योगं तं विद्धि पाण्डव

न ह्यसंन्यस्तसंकल्पो योगी भवति कश्चन

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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