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अध्याय 9 — राजविद्या राजगुह्य योग

श्लोक 3
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अश्रद्दधानाः पुरुषा धर्मस्यास्य परंतप ।

अप्राप्य मां निवर्तन्ते मृत्युसंसारवत्र्त्मनि ॥3 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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