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अध्याय 9 — राजविद्या राजगुह्य योग

श्लोक 6
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

यथाकाशस्थितो नित्यं वायुः सर्वत्रगो महान् ।

तथा सर्वाणि भूतानि मत्स्थानीत्युपधारय ॥ 6 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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