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अध्याय 15 — पुरुषोत्तम योग

श्लोक 3
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

न रूपमस्यह तथापलभ्यत नान्ता न चादिन च सम्प्रतिष्ठा ।

अश्वत्थमेनं सुविरूढमलमसंगशस्त्रेण दृढेन छित्त्वा ॥3 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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