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अध्याय 15 — पुरुषोत्तम योग

श्लोक 10
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

उत्क्रामन्तं स्थितं वापि भुंजानं वा गुणान्वितम् ।

विमूढा नानुपश्यन्ति पश्यन्ति ज्ञानचक्षुषः ।॥ 10 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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