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अध्याय 15 — पुरुषोत्तम योग

श्लोक 9
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

श्रोत्रं चक्षुः स्पर्शनं च रसनं घ्राणमेव च।

अधिष्ठाय मनश्चायं विषयानुपसेवते ॥१ ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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