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Chapter 1 Verse 45

अध्याय 1 — अर्जुन विषाद योग

श्लोक 45
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम् ।

यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः ॥45॥

🕉 हिन्दी अनुवाद

📜 अनुवाद हिन्दी

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