भाषा चुनें:
Chapter 1 Verse 38-39

अध्याय 1 — अर्जुन विषाद योग

श्लोक 38-39
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः ।

कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम् ॥38॥


कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम् ।

कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ॥39॥

🕉 हिन्दी अनुवाद

📜 अनुवाद हिन्दी

💬 व्याख्या हिन्दी

🎬 वीडियो प्रवचन
Gita Prerna Logo
Go Back Top