भाषा चुनें:

अध्याय 14 — गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 7
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

रजो रागात्मकं विद्धि तृष्णासंग समुद्भवम् ।

तन्निबध्नाति कौन्तेय कर्मसंगेन देहिनम् ॥ 7 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


Gita Prerna Logo
Go Back Top