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अध्याय 14 — गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 2
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

इदं ज्ञानमुपाश्रित्य मम साधर्म्यमागताः ।

सर्गेऽपि नोपजायन्ते प्रलये न व्यथन्ति च ।। 2 ।।

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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