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अध्याय 14 — गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 24-25
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

समदुःखसुखः स्वस्थः समलोष्टाश्मकांचनः ।

तुल्यप्रियाप्रियो धीरस्तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः ।। 24 ॥


मानापमानयोस्तुल्यस्तुल्यो मित्रारिपक्षयोः ।

सर्वारम्भ परित्यागी गुणातीतः स उच्यते ॥ 25 ॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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