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अध्याय 16 — दैवासुरसंपद विभाग योग

श्लोक 8
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

असत्यमप्रतिष्ठं ते जगदाहुरनीश्वरम् ।

अपरस्पर सम्भूतं किमन्यत्कामहैतुकम् ॥8॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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