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अध्याय 16 — दैवासुरसंपद विभाग योग

श्लोक 15
🕉 मूल संस्कृत श्लोक

आढ्योऽभिजनवानस्मि कोऽन्योऽस्ति सदृशो मया ।

यक्ष्ये दास्यामि मोदिष्य इत्यज्ञानविमोहिताः ॥15॥

🕉 हिन्दी अनुवाद


📜 अनुवाद हिन्दी


💬 व्याख्या हिन्दी


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